हरियाली अमावस्या, जिसे सावन अमावस्या या श्रावण अमावस्या भी कहा जाता है, एक ऐसा पर्व है जो धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय रीति-रिवाजों का अनूठा संगम है। यह पर्व सावन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है और प्रकृति, पूर्वजों, और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। नीचे हरियाली अमावस्या के प्रमुख रीति-रिवाज दिए गए हैं, जो इस पर्व को विशेष बनाते हैं:
1. प्रातः स्नान और पवित्रता
- रीति: इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी, तालाब, या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान किया जाता है। यह स्नान शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए आवश्यक माना जाता है।
- महत्व: स्नान से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पूजा-अनुष्ठान के लिए मन पवित्र होता है।
- विशेष: यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर पानी में गंगाजल या तुलसी के पत्ते डालकर स्नान करें।
2. व्रत और संकल्प
- रीति: हरियाली अमावस्या पर व्रत रखने की परंपरा है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
- महत्व: व्रत से आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। यह पितरों और भगवान शिव को समर्पित होता है।
- विशेष: कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
3. शिव पूजा और रुद्राभिषेक
- रीति: इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मंदिर में या घर पर शिवलिंग की स्थापना कर दूध, दही, शहद, गंगाजल, और बिल्वपत्र से अभिषेक किया जाता है। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ आम है।
- महत्व: यह पूजा जीवन के कष्टों, पितृ दोष, और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में सहायक मानी जाती है।
- विशेष: बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, और श्वेत पुष्प अर्पित करना विशेष रूप से शुभ होता है।
4. पितृ तर्पण और पिंडदान
- रीति: हरियाली अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है। काले तिल, जौ, और जल का उपयोग कर पितरों को तर्पण अर्पित किया जाता है।
- महत्व: यह रिवाज पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करता है और पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
- Vविशेष: यह अनुष्ठान किसी पवित्र नदी के किनारे या घर पर ब्राह्मण की देखरेख में किया जाता है।
5. वृक्ष पूजा और वृक्षारोपण
- रीति: इस दिन पीपल, बरगद, या अन्य पवित्र वृक्षों की पूजा की जाती है। वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटा जाता है, धूप-दीप जलाया जाता है, और जल अर्पित किया जाता है। साथ ही, वृक्षारोपण का रिवाज भी प्रचलित है।
- महत्व: यह रिवाज प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देता है। पीपल को भगवान विष्णु और शिव का प्रतीक माना जाता है।
- विशेष: सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करना इस दिन की विशेषता है।
6. दान-पुण्य
- रीति: हरियाली अमावस्या पर ब्राह्मणों, गरीबों, और जरूरतमंदों को अन्न, फल, वस्त्र, और धन का दान किया जाता है। विशेष रूप से काले तिल, चावल, और सात्विक भोजन दान करने की परंपरा है।
- महत्व: दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
- विशेष: दान हमेशा श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से करना चाहिए।
7. नान्दीमुख श्राद्ध
- रीति: कुछ क्षेत्रों में इस दिन नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है, जिसमें तीन पीढ़ियों के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
- महत्व: यह रिवाज परिवार की समृद्धि और सुख-शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- विशेष: यह अनुष्ठान पंडित की देखरेख में किया जाता है।
8. सात्विक जीवनशैली का पालन
- रीति: इस दिन तामसिक भोजन (मांस, मछली, लहसुन, प्याज) से परहेज किया जाता है। सात्विक भोजन या फलाहार का सेवन किया जाता है।
- महत्व: यह रिवाज मन और शरीर को शुद्ध रखने में मदद करता है।
- विशेष: इस दिन नकारात्मक विचारों, क्रोध, और विवादों से भी बचना चाहिए।
9. मंत्र जाप और ध्यान
- रीति: हरियाली अमावस्या पर “ॐ नमः शिवाय”, “महामृत्युंजय मंत्र”, या “गायत्री मंत्र” का जाप किया जाता है। साथ ही, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास भी प्रचलित है।
- महत्व: यह आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है और मन को शांति प्रदान करता है।
- विशेष: जाप के दौरान रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
10. पर्यावरण संरक्षण की पहल
- रीति: इस दिन कई समुदाय और संगठन सामूहिक वृक्षारोपण, नदियों की सफाई, और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
- महत्व: यह रिवाज प्रकृति के प्रति भारतीय संस्कृति की गहरी निष्ठा को दर्शाता है।
- विशेष: व्यक्तिगत स्तर पर भी एक पौधा लगाकर इस रिवाज में योगदान दिया जा सकता है।
विशेष बातें
- हरियाली अमावस्या के रीति-रिवाज क्षेत्र और समुदाय के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर भारत में पीपल पूजा और वृक्षारोपण पर अधिक जोर दिया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में पितृ तर्पण और शिव पूजा प्रमुख होती है।
- इस दिन किए गए कार्यों में श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- हरियाली अमावस्या 2025 में गुरु पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग इसे और भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।