भारत के सबसे प्रभावशाली और धनाढ्य परिवारों में से एक, अंबानी परिवार की बड़ी बहू श्लोका मेहता अंबानी ने अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं को संतुलित करने और समाज के लिए कुछ सार्थक करने की अपनी प्रेरणादायक कहानी साझा की है। प्रिंसटन और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पढ़ाई पूरी करने वाली श्लोका एक समाजसेवी, उद्यमी और दो बच्चों की मां हैं। अपनी हालिया बातचीत में, उन्होंने अपनी गैर-लाभकारी संस्था कनेक्टफॉर के माध्यम से स्वयंसेवा, मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने के अपने अनुभव को खुलकर बताया। आइए, इस ब्लॉग में श्लोका के इस प्रेरणादायक सफर को एक नए अंदाज में जानते हैं
श्लोका मेहता अंबानी: एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
श्लोका मेहता, मशहूर हीरा व्यापारी रसेल मेहता और मोना मेहता की सबसे छोटी बेटी, ने हमेशा अपनी सादगी और मेहनत से लोगों का ध्यान खींचा है। मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी की पत्नी श्लोका ने मार्च 2019 में एक भव्य समारोह में शादी की थी। दोनों बचपन के दोस्त थे और धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में एक साथ पढ़े थे। आज, श्लोका और आकाश दो बच्चों – बेटे पृथ्वी (जन्म: दिसंबर 2020) और बेटी वेदा (जन्म: मई 2023) के माता-पिता हैं।
श्लोका ने अपनी पढ़ाई प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी में और LSE से लॉ में पूरी की। वह आसानी से अपने परिवार के हीरा व्यवसाय, रोसी ब्लू डायमंड्स, में शामिल हो सकती थीं, लेकिन उन्होंने समाजसेवा का रास्ता चुना। 2014 में मुंबई लौटने के बाद, उन्होंने रोसी ब्लू फाउंडेशन के साथ काम शुरू किया और फिर अपनी दोस्त मनीति शाह के साथ कनेक्टफॉर की स्थापना की।
कनेक्टफॉर: स्वयंसेवा का ‘शादी.कॉम’
श्लोका ने कनेक्टफॉर को “स्वयंसेवा के लिए शादी.कॉम” कहकर इसका मजेदार लेकिन सटीक वर्णन किया। यह एक ऐसा मंच है जो स्वयंसेवकों और गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) को जोड़ता है। श्लोका और मनीति ने 2014 में इसकी शुरुआत की, जब उन्होंने देखा कि कई लोग स्वयंसेवा करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही अवसर नहीं मिलते। आज, कनेक्टफॉर ने 1 लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों को 1000 से अधिक NGOs से जोड़ा है और 4.18 लाख घंटे की स्वयंसेवा के साथ NGOs को 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत करवाई है।
श्लोका ने मसूम मिनावाला के पॉडकास्ट में कहा, “हमारा लक्ष्य शुरुआत में मुंबई के लिए एक वन-स्टॉप सॉल्यूशन बनना था, लेकिन अब हम पूरे देश में फैल चुके हैं। हम अमेजन जैसे बड़े कॉरपोरेट्स और 120 से ज्यादा कॉरपोरेट्स और 150 स्टूडेंट ग्रुप्स के साथ काम कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि समाजसेवा में आर्थिक चुनौतियां बहुत हैं। “सोशल वर्क अच्छा पैसा नहीं देता। इसके लिए आपको आंतरिक प्रेरणा और कहानियों से प्रेरित होने की जरूरत है,” उन्होंने कहा।
मातृत्व और करियर: एक संतुलन की कला
श्लोका ने मां होने की जिम्मेदारियों और अपने मिशन के बीच संतुलन बनाने के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है जब मैं अपने बच्चों को कहती हूं कि जैसे तुम स्कूल जाते हो, मम्मी को ऑफिस जाना पड़ता है। हम सब कुछ न कुछ बेहतर करने के लिए कर रहे हैं।” उनके लिए, कनेक्टफॉर न केवल एक संगठन है, बल्कि यह उनके बच्चों – पृथ्वी और वेदा – और उनकी भतीजी-भतीजे के लिए एक विरासत है।
“मैं नहीं चाहती कि मेरे बच्चे सिर्फ सामाजिक कार्य करें, लेकिन मैं चाहती हूं कि वे यह समझें कि अगर आप किसी चीज में यकीन करते हैं, तो आपको अवसर खुद बनाना होगा। यह सबसे अच्छी विरासत है जो आप अपने बच्चों के लिए छोड़ सकते हैं,” श्लोका ने भावुक होकर कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बच्चों को यह जानना चाहिए कि कोई भी करियर ठीक है, चाहे वह ज्यादा पैसे कमाने वाला हो या समय लेने वाला, बशर्ते आप उसमें मूल्य देखें।
श्लोका की यह सोच न केवल उनके बच्चों, बल्कि समाज के सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। वह चाहती हैं कि बच्चे दुनिया को समझें और सोचें कि वे इसके लिए क्या कर सकते हैं।
परिवार का समर्थन: सबसे बड़ी ताकत
कनेक्टफॉर की सफलता के पीछे श्लोका और मनीति के परिवारों का अटूट समर्थन रहा है। श्लोका ने कहा, “हमारा सबसे बड़ा उपलब्धि यह है कि हमने इस संगठन को जिंदा रखा। यह तब तक संभव नहीं था, जब तक हमारे परिवार, खासकर मेरे पति आकाश, हमारी दृष्टि में विश्वास नहीं करते।”
आकाश अंबानी, जो रिलायंस जियो के चेयरमैन हैं, ने भी श्लोका की तारीफ की है। मुंबई टेक वीक 2025 में एक बातचीत के दौरान, आकाश ने कहा, “मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे श्लोका जैसी पत्नी मिली, जो मेरे लंबे काम के घंटों को समझती है। लेकिन मेरे लिए काम की गुणवत्ता मायने रखती है, न कि घंटे।”
समाजसेवा की चुनौतियां और प्रेरणा
श्लोका ने सामाजिक क्षेत्र की चुनौतियों को भी खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि भारत में सामाजिक क्षेत्र को वह सम्मान और फंडिंग नहीं मिलती, जिसका वह हकदार है। उन्होंने एक उदाहरण दिया, “सरकार ने स्कूलों में टॉयलेट बनाए, यह बहुत अच्छा था। लेकिन उनकी देखभाल नहीं हुई, और लड़कियों को स्वच्छता शिक्षा नहीं दी गई, जिसके कारण समस्या फिर से उभर आई।”
श्लोका और उनकी सह-संस्थापक मनीति शाह का मानना है कि कनेक्टफॉर एक स्टार्टअप की तरह काम करता है, लेकिन इसमें आत्मा है। “हम हर स्वयंसेवा के घंटे को ट्रैक करते हैं, ऑडिट करते हैं और ऑप्टिमाइज करते हैं। यह समय का रिटर्न है,” श्लोका ने कहा।
सादगी और समाज के प्रति जिम्मेदारी
श्लोका की सादगी और जिम्मेदारी की भावना ने उन्हें कई बार सुर्खियों में लाया है। हाल ही में, रणधीर कपूर के 78वें जन्मदिन समारोह में, श्लोका को अपने बच्चों पृथ्वी और वेदा के साथ देखा गया। इस दौरान, उन्होंने एक बच्चे द्वारा गिराए गए कचरे को उठाया, जिसके लिए सोशल मीडिया पर उनकी खूब तारीफ हुई।
इसके अलावा, वह नीता मुकेश अंबानी जूनियर स्कूल के पहले स्पोर्ट्स डे में भी शामिल हुईं, जहां उन्होंने बच्चों के साथ दौड़ में हिस्सा लिया। उनकी यह सहजता और बच्चों के साथ जुड़ाव उनकी जमीन से जुड़ी शख्सियत को दर्शाता है।
श्लोका का सपना: एक बेहतर समाज
श्लोका का सपना केवल अपने बच्चों के लिए एक विरासत छोड़ना नहीं है, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है जहां लोग स्वयंसेवा को अपनाएं और सामाजिक कार्य को सम्मान दें। उनकी कहानी उन सभी मांओं, उद्यमियों और समाजसेवियों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं।
मसूम मिनावाला के पॉडकास्ट में श्लोका ने कहा, “मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे और मेरे भतीजे-भांजे यह समझें कि अगर आप किसी चीज के प्रति जुनूनी हैं, तो उसे फॉलो करें। यह दुनिया को बेहतर बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।”
निष्कर्ष: एक प्रेरणादायक रोल मॉडल
श्लोका मेहता अंबानी की कहानी एक ऐसी महिला की है जो अपने करियर, बच्चों और समाज के लिए अपने मकसद को एक साथ संजोए हुए है। कनेक्टफॉर के माध्यम से उन्होंने न केवल लाखों स्वयंसेवकों को एक मंच दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि सच्ची सफलता पैसे में नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए योगदान में है। उनकी सादगी, मेहनत और परिवार के प्रति समर्पण उन्हें एक सच्चा रोल मॉडल बनाता है।
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नोट: यह ब्लॉग विभिन्न समाचार लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आधारित है। कुछ जानकारी अनुमानित हो सकती है, इसलिए नवीनतम अपडेट्स के लिए विश्वसनीय स्रोतों की जांच करें।